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धरती से 20 मील ऊपर ले जाने वाला लग्जरी यान तैयार, कॉकटेल संग मिलेगा अंतरिक्ष यात्रा का लुत्फ, 900 टिकट बिकी

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दोस्तों, क्या आपने कभी बेहद ऊंचाई पर जाकर धरती का नजारा देखा है। शायद, कुछ लोगों ने हवाई यात्रा के दौरान धरती का अद्भुत नजारा जरूर देखा होगा। जब हम बहुत ऊपर से नीचे की ओर देखते हैं, तो सब कुछ कितना छोटा नजर आता है और धरती का मनमोहक दृश्य भी दिखता है। इसके साथ ही हवाई यात्रा के जरिए आप और हम आसमान की एक रोमांचक सैर भी करते हैं।  हालांकि, हवाई जहाज के जरिए आप धरती से 7 से 8 मील ऊपर ही जा सकते हैं। लेकिन अगर आप धरती से 20 मील (105600 फीट) ऊपर जाकर धरती का अद्भुत से भी अद्भुत नजारा देखना चाहते हैं, तो 'स्पेसशिप नेपच्यून' आपका इंतजार कर रहा है। इस यान के जरिए आप अंतरिक्ष की सैर का लुत्फ उठा सकेंगे। जी हां दोस्तों, फ्लोरिडा की 'स्पेस पर्सपेक्टिव' नामक कंपनी ने अपने स्पेसशिप नेपच्यून का उद्घाटन कर दिया है। कंपनी के मुताबिक, इसके डिजाइन को अंतिम रूप दिया जा चुका है। ये स्पेसशिप बेहद लग्जरी और गोलाकार पॉड जैसा है। इसमें ऐशोआराम से आप सफर का लुत्फ उठा सकते हैं। यह आपको धरती से 20 मील ऊपर छह घंटे की यात्रा पर ले जाएगा। इस गोलाकार पॉड को आसमान में ले जाने का काम एक विशाल गुब्बारा क...

16,700 फीट गहरे समुद्र में मिली अनोखे आकार की 48 प्रजातियां, देखें तस्वीरें

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दोस्तों, आपने समुद्र के किनारे तो कई बार सैर की होगी, लेकिन क्या आपने सैर करते हुए कभी समुद्र तल पर रहने वाले जीवों के बारे में जानने की कोशिश की है। शायद, कुछ लोग ही समुद्री जीवों में दिलचस्पी लेते हैं। खैर, हम आपको बता दें कि लंदन स्थित नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम (प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय) के वैज्ञानिकों को समुद्र की गहराई में रहने वाले जीवों की 48 प्रजातियां मिली हैं।  खास बात यह है कि इनमें से 39 प्रजातियां नई हैं, जबकि नौ प्रजातियों के बारे में वैज्ञानिक पहले से जानते हैं। दोस्तों, क्या आप यकीन कर सकते हैं कि समुद्री जीवों की इतनी सारी प्रजातियां हैं। केवल यही नहीं, इन विभिन्न प्रजातियों की खासियत यह है कि इनका आकार एकदम विचित्र तरह का है। कोई ट्यूलिप जैसी है, तो कोई चिपचिपी गिलहरी जैसी,तो कोई आलू की तरह दिखती है। इसका नाम गमी स्क्विरल है। यह गोंद की तरह चिपचिपी है। इसे  साइक्रोपोट्स लॉन्गिकाउडा भी कहते हैं। इसकी लंबाई 60 सेमी है। इसका आंतरिक भाग लाल रंग का है। ये प्रजातियां मध्य प्रशांत महासागर में क्लेरियन-क्लिपरटन ज़ोन में 16,700 फीट (5,100 मीटर) पानी के नीचे पाई गई है...

रूस क्यों छोड़ रहा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का साथ, जानें हकीकत

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रूस ने 2024 के बाद अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के साथ काम न करने का फैसला लिया है। हाल ही में रॉस्कॉस्मॉस के नए चीफ ने आईएसएस से बाहर निकलने की घोषणा की है। नए चीफ यूरी बोरिसोव ने मंगलवार को कहा कि रूस अपना खुद का ऑर्बिटिंग आउटपोस्ट बनाने पर ध्यान दे रहा है। हालांकि, यह घोषणा उन्होंने ऐसे वक्त पर की है, जब यूक्रेन में लड़ाई को लेकर मॉस्को और पश्चिम के बीच काफी तनाव की स्थिति बनी हुई है। घोषणा से लगता है कि रूस और यूक्रेन के युद्ध की लपटें अंतरिक्ष तक पहुंच गई हैं।   अपने दायित्व पूरा करेगा रूस एसोसिएट प्रेस के मुताबिक, हाल ही में नियुक्त हुए रॉस्कॉस्मॉस के नए चीफ यूरी बोरिसोव ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा कि रूस 2024 तक आईएसएस छोड़ने का फैसला कर चुका है। उन्होंने आगे कहा, उस समय तक रूस अपना ऑर्बिटिंग स्पेस स्टेशन बनाना शुरू कर देगा। साथ ही उन्होंने आईएसएस का साथ छोड़ने से पहले अपने सहयोगियों के साथ अपने दायित्वों को पूरा करने की बात भी सुनिश्चित की। नासा ने नहीं की कोई टिप्पणी गौरतलब है कि नासा और उसके सहयोगियों ने आईएसएस का ...

चांद पर धरती की तरह ग्रेविटी संभव बनाएगा 'द ग्लास'

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नासा इस दशक के अंत तक इंसान को चांद पर वापस ले जाने की योजना बना रहा है। चांद पर बसने की अवधारणा को तेजी से गति मिल रही है। इस सिलसिले में   चांद पर स्थिरता बनाने के लिए वैज्ञानिक एक संरचना बनाने पर काम कर रहे हैं , जिसकी ऊंचाई लगभग 1300 फीट होगी। इस संरचना को ' द ग्लास ' नाम दिया गया है। इस संरचना को बनाने की नई   महत्वाकांक्षी योजना का खुलासा जापानी वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है। यह संरचना सामान्य गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी) प्राप्त करने के लिए हर 20 सेकेंड में घूमेगी। इसका उद्देश्य कृत्रिम गुरुत्वाकर्षण उत्पन्न करना होगा , ताकि धरती की तरह चांद पर स्थिरता बनाई जा सके। क्योटो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं और टोक्यो की एक कंस्ट्रक्शन फर्म काजिमा कॉर्पोरेशन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संरचना बनाने के इस विचार को पेश किया।   क्योटो विश्वविद्यालय के एसआईसी ह्यूमन स्पेशियोलॉजी सेंटर के डायरेक्टर योसुके यामाशिकी ने कहा ने कहा कि अन्य देशों में इस तरह की कोई अंतरिक्ष विकास योजनाएं नहीं हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि मानव जाति बाहरी अंतरिक्ष में कई युगों से रह रही है लेकिन अब वो मंगल और ...

इंसानों को नया जीवन दे सकेंगे सुअर!

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दुनियाभर में लोग अंग प्रत्यारोपण के इंतजार में अपनी जिंदगी खो रहे हैं। अगर जीवों के अंग इंसानों में प्रत्यारोपित किए जाएं, तो लाखों लोगों को नया जीवन मिल सकता है। हाल ही में मैरीलैंड मेडिकल सेंटर के चिकित्सकों ने इसे लेकर एक शोध किया है।  शोध में यह दर्शाया गया है कि सुअर के अंगों को इंसानों में प्रत्यारोपित करना संभव है। शोधकर्ताओं ने गंभीर रूप से एक बीमार व्यक्ति में सुअर का दिल प्रत्यारोपित कर उसे नई जिंदगी दी।  जीवों के अंग इंसानों में प्रत्यारोपित करने को चिकित्सीय भाषा में जेनोट्रांसप्लांट कहा जाता है।  अमेरिकी एफडीए ने चिकित्सकों से जेनोट्रांसप्लांट पर अभी और शोध करने के लिए कहा है, क्योंकि जेनोट्रांसप्लांट सफल होने के दो माह बाद उस व्यक्ति की मौत हो गई। फिलहाल, मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। इसके चलते जीवों के अंग इंसानों में सफलतापूर्वाक प्रत्यारोपित करने के लिए अधिक शोध की आवश्यकता जताई गई है।  नॉर्थ कैरोलिना के डरहम में स्थित ड्यूक यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के ट्रांसप्लांट सर्जन एलन किर्क ने कहा कि प्रत्यारोपण के आंकड़े  कुछ चयनति मरीजों में छ...