चांद पर धरती की तरह ग्रेविटी संभव बनाएगा 'द ग्लास'
नासा इस दशक के अंत तक इंसान को
चांद पर वापस ले जाने की योजना बना रहा है। चांद पर बसने की अवधारणा को तेजी से
गति मिल रही है। इस सिलसिले में चांद पर स्थिरता बनाने के लिए
वैज्ञानिक एक संरचना बनाने पर काम कर रहे हैं, जिसकी ऊंचाई
लगभग 1300 फीट होगी। इस संरचना को 'द ग्लास' नाम दिया गया
है। इस संरचना को बनाने की नई महत्वाकांक्षी योजना का खुलासा
जापानी वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है। यह संरचना सामान्य गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी) प्राप्त
करने के लिए हर 20 सेकेंड में घूमेगी। इसका उद्देश्य कृत्रिम गुरुत्वाकर्षण
उत्पन्न करना होगा, ताकि धरती की तरह चांद पर स्थिरता बनाई जा सके।
क्योटो यूनिवर्सिटी के
शोधकर्ताओं और टोक्यो की एक कंस्ट्रक्शन फर्म काजिमा कॉर्पोरेशन ने प्रेस
कॉन्फ्रेंस के दौरान संरचना बनाने के इस विचार को पेश किया। क्योटो विश्वविद्यालय के एसआईसी
ह्यूमन स्पेशियोलॉजी सेंटर के डायरेक्टर योसुके यामाशिकी ने कहा ने कहा कि अन्य
देशों में इस तरह की कोई अंतरिक्ष विकास योजनाएं नहीं हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि
मानव जाति बाहरी अंतरिक्ष में कई युगों से रह रही है लेकिन अब वो मंगल और चांद पर
बसने की ओर अपने कदम बढ़ा रही है। उन्होंने आगे कहा कि चांद और मंगल पर किस तरह की
सुविधाएं और वातावरण प्राप्त करना जरूरी है..? और खाने, पहनने, रहने और सामाजिक तंत्र की व्यवस्था बनाने के लिए कौन-सी
तकनीक व दृष्टिकोण महत्वपूर्ण है।
भविष्य में ये सुविधाएं भी होंगी चांद पर
साथ ही भविष्य के लिए और भी कई योजनाएं बताई गईं, जिसमें धरती की जैव विविधता की तरह ही चांद पर जंगल और तटों को बनाना शामिल है। इसके अलावा परिवहन प्रणाली भी बनाई जाएगी, जिसका नाम हेक्सागोन स्पेस ट्रैक सिस्टम होगा। यह इंटरप्लेनेटरी स्पेस ट्रेन धरती, चांद और मंगल के बीच यात्रा करते समय अपना गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी) उत्पन्न करेगी। शोधकर्ताओं के पास लंबे समय के लिए और भी कई योजनाएं हैं, जिसमें चांद के लिए 'लूनर ग्लास' और मंगल के लिए 'मार्स ग्लास' नाम की दो अलग-अलग सुविधाएं बनाना शामिल है।
चांद पर सुरक्षित रूप से बच्चों को दे सकेंगे जन्म
द ग्लास के विचार
के बारे में उन्होंने कहा कि इस सुविधा में मानव जाति सेहतमंद रहकर बच्चों को जन्म दे सकती है और किसी भी वक्त
धरती पर लौट सकती है। विशेषज्ञों ने
कहा कि द ग्लास को बनने में तकरीबन 100 वर्ष लगेंगे।
हालांकि, इसका सही वर्जन 2050 तक चांद पर हो
सकता है।

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