बालों को उगाने में मदद करेगा यह प्रोटीन, गंजेपन से मिलेगा छुटकारा!
दोस्तों, आपने उजड़ा चमन और बाला मूवी तो देखी ही होगी। दोनों ही फिल्में गंजेपन से जूझ रहे व्यक्ति की स्थिति को दर्शाती हैं। भले ही ये फिल्म उन लोगों के लिए कॉमेडी से भरपूर है, जिनके सिर पर भरे-पूरे बाल हैं। लेकिन जो लोग असल में गंजेपन को झेल रहे हैं, वे बालों को पाने के लिए क्या-क्या नहीं करते, ये हकीकत तो सिर्फ वही जानते हैं। कुछ लोग बाल उगाने वाला तेल लगाते हैं, तो कुछ घरेलु नुस्खे अपनाते हैं। वहीं कुछ लोग दवाइयों का, तो कुछ हेयर ग्रोथ वाला शैंपू इस्तेमाल कर बस जल्द से जल्द अपने बाल वापस पाना चाहते हैं। गंजापन खासकर, युवाओं के लिए बड़ा ही तकलीफदेह होता है। सिर पर बाल न होने के चलते एक तो लोग उनको टकला, गंजा, उजड़ा चमन जैसे नामों से चिढ़ाते हैं, दूसरा उनको शादी के लिए पार्टनर न मिलने में भी परेशानी आती है।
खैर, गंजे लोगों के लिए वैज्ञानिकों ने एक ऐसे प्रोटीन की खोज की है, जो हेयर फॉलिकल को नष्ट होने से रोकता है। हेयर फॉलिकल, सिर की त्वचा पर छोटे-छोटे छिद्रों को कहा जाता है, जहां से बाल विकसित होते हैं। वैज्ञानिकों के नए शोध के मुताबिक, यह प्रोटीन बालों को फिर से विकसित करने की प्रक्रिया संभव कर सकता है। इस प्रोटीन को TGF-beta के नाम से जाना जाता है। यह प्रोटीन कोशिकाओं के विभाजित होने, विकसित होने और नष्ट होने को नियंत्रित करता है।
'बायोफिजिकल जर्नल' में प्रकाशित यह शोध University of California Riverside के शोधकर्ताओं ने किया है। उन्होंने पाया कि TGF-beta हेयर फॉलिकल के अंदर कोशिकाओं तक अपना काम विस्तार से करता है। टीजीएफ-बीटा (ट्रांसफॉर्मिंग ग्रोथ फैक्टर बीटा) एक प्रकार का साइटोकाइन है। साइटोकाइन्स छोटे प्रोटीन होते हैं जो अन्य प्रतिरक्षा प्रणाली कोशिकाओं और रक्त कोशिकाओं की वृद्धि और गतिविधि को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
दो तरीके से काम करता है टीजीएफ-बीटा
अध्ययन के को-ऑथर किक्सुआन वांग ने कहा कि टीजीएफ-बीटा दो काम करता है, जो एक-दूसरे से बिल्कुल विपरित होते हैं। पहला, यह बालों को फिर से विकसित करने के लिए कुछ हेयर फॉलिकल कोशिकाओं को सक्रिय करने में मदद करता है। दूसरा, यह कोशिकाओं को एपोप्टोसिस (कोशिका मरने की प्रक्रिया) में बदल देता है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि ये दो विपरित शक्तियां प्रोटीन के स्तर के हिसाब से नियंत्रित होती है। TGF-beta की सही मात्रा होने पर कोशिका विभाजन सक्रिय होता है और फॉलिकल का विकास फिर से शुरू हो जाता है। लेकिन, अगर इसकी मात्रा अधिक होती है तो यह कोशिकाओं को एपोप्टोसिस में परिवर्तित कर देता है, जिससे हेयर फॉलिकल नष्ट हो जाते हैं और इसके चलते गंजापन होने लगता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह जरूरी नहीं कि बालों को वापस पाने का केवल यही एक रास्ता हो। फॉलिकल स्टेम कोशिकाएं अभी भी निष्क्रिय अवस्था में हैं और फिर से सक्रिय होने की प्रतीक्षा कर रही हैं। भविष्य में किए जाने वाला और शोध गंजेपन और बालों के झड़ने से रोकने का नया उपचार ला सकताा है, जिसमें यह पता चल सकता है कि टीजीएफ-बीटा सही तरीके से कोशिका विभाजन को कैसे सक्रिय करता है और संबंधित जीन्स से कैसे संपर्क करता है।
शोधकर्ता वांग ने कहा, वास्तव में यह निश्चित नहीं हैं कि प्रोटीन बालों के छिद्रों को क्यों मारता है। हालांकि, यह छिद्रों के अंदर स्टेम कोशिका के कुंड को नहीं मारता। जब जीवित स्टेम कोशिकाओं को फिर से उत्पन्न करने के लिए संकेत मिलता है, तो वे विभाजित होते हैं, नई कोशिकाएं बनाते हैं और एक नए कुंड में विकसित होते हैं।

good work. keep it up.
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